Ram Bhadawar

Discover the soul of words!
यही दिन प्यार के झंकार के हैं, मगर टंकार के दिन भी यही हैं।
यही दिन हैं खनकती चूड़ियों के, मगर तलवार के दिन भी यही हैं।।
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IPL सट्टेबाज़ों का महाकुंभ या नई प्रतिभाओं का उदय
हम भारत के लोग अपनी परम्पराओं का बहुत सम्मान करते हैं। परंपरायें चाहे कैसीं भी हों उनको आगे बढ़ाना हमारा परम कर्तव्य है। हाँ वह बात और है कि कुछ परंपरायें निभाने में दैनिक जीवन की व्यस्तताए आढ़े आ जातीं हैं। किंतु जहां तक संभव होता है हम अपनी परम्पराओं को आगे बढ़ाने...
हिन्दुओं की सहिष्णुता का परिणाम है। पहलगाम।
हिंदुओं तुम्हें क़सम है अब भी मत जागना, क्योकि इस तस्वीर में जो बहन बैठी है वो हमारी थोड़ी है , इस घटना में जो दिवंगत हुए है वो हमारे थोड़ी है, तो हम क्यो रोए क्यो जागे, मरते रहते है लोग, मृत्यु ही परम सत्य है मरना तो है ही सबको एक दिन, आज मरे या कल मरे, क्या फ़र्क...
क्या भारतीय मध्यवर्ग विलुप्त हो रहा है
देश की आजादी से पहले भारतीय मध्यवर्ग दो भागों में बंटा हुआ था। एक तरह का मध्यवर्ग अंग्रेजी राज में अपना हित साधने में लगा था, अंग्रेजों की गुलामी कर सुख-सुविधा जुटाना उसकी प्राथमिकता थी। दूसरी तरफ, एक ऐसा मध्यवर्ग था जो अपने देश की आजादी के बारे में सोच रहा था। वह...
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